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बुधवार, 22 मार्च 2017

*23 मार्च शहीदे आझम ने अंजळी.*

*23 मार्च ..शहीदे आझम ने अंजळी.*

,          *हिंद जाया नुं हालरडु*

पिता किसन सिंह अने मां विध्यावती ने ज्यारे पोताना खोळाना खुंदनार ने फांसी नी पेहला छेल्ली वखत मळवा जवानुं हशे..ई चोविस मी मार्च ना लाहोर जेल ने दरवाजे मां पोताना दीकरा ने छेल्ली वार मळवाना अबरखे उभी हसे अने खबर मळे के फांसी तो काल रात्रेज अपाई गई..अने मृत देह सोंपाणो होय..ई आंखो बंद करी ने सुतेला त्रण सावजो ..मां भारती ना भुलकां...सुखदेव राजगुर अने भगतसिंह...ऐनी बंध आखो जोई मां ने काळजे केवा घा वाग्या हशे...आ हिंद ने बिजा तो शुं ठबका देवा ? ,,.,

.            *|| हाला गाउं हिंद ना लाला ||*
.        *रचना : जोगीदान गढवी (चडीया )*
.           *राग:  बेटी बहुं बाप ने व्हाली*

लोट्यो तुंतो हिंद ना लाला, हैडा फाट गाउं हुं हाला
काळजडाने बोल ई काला, भोकें मारी छातीये भाला...टेक

निकळ्यो तो तुं निहाळ जावा ने, जलीया वाला जेल
दील दीधुं तुं देस ने तारा, मन मां नोंहतोय मेल
आग्युं घट सळगे आला..हाला गाउं हिंद ना लाला..||01||

खेतरे जई ने खेलतो तो तुं, हळ वावी हथीयार
जोई रहे केम सिखणीं जायो, मातृ भुमी ने मार
मंड्यो लईन हाथ मिशाला, हाला गाउं हिंद ना लाला..||02||

आटक्यो तुं अंगरेज ने माथे, बाटक्यो तुं बळवान
साटक्यो तें सारडील ने सेरी, जाटक्यो लीधेल जान
दागी त्रण गोळीयुं डाला..लीधूं तेंतो वेर ई लाला...||03||

दोसतारुं संग दीधीयुं तेतो, घारा सभा मां धिंह..
बोम फेंकी ने तुं बंकडा बोल्यो, हुं सिखणीं जायो सिंह
अंगरेजांय भर्य उचाला, हरखी तारा गाउं हुं हाला..||04||

थथरी गोरा ना काळजां कंप्या, पाडतां तुं  पड़कार
जुलतो लाहोर मांचडे जोया, अमे  हिंद माता नो हार
विरा त्रण लागीया वाला, हाला गाउ हिंद ना लाला..||05||

हिंद हैये तुं हीबकी हाल्यो, सहीद आजम नो सूर
जननीने जोगीदान जळेळ्या, पांपणे आंहुना पूर
ठबका शुं आ देस ने ठाला, हाला गाउं हिंद ना लाला..||06||,, ..

सोमवार, 20 मार्च 2017

*दोस्ती* शब्द का अर्थ

*दोस्ती* शब्द का अर्थ
बड़ा ही मस्त होता है .., ( दो+हस्ती )
जब दो हस्ती मिलती हैं ..,
                  तब दोस्ती होती है ... ...
*समुंदर* _ _ ना हो तो _ _*कश्ती* _ _ किस काम कीं ..._                                       
*मजाक*_ _ना हो , तो _ _ *मस्ती* _ _ किस काम की ... _                            
*दोस्तों* _ _ के लिए तो कुर्बान है , ये _ _ *जिंदगी...* _                          
अगर _ _ *दोस्त* _ _ ही ना हो , तो फिर ये _ _ *जिंदगी* _ _ किस काम कीं ...

चंद लाइने दोस्तों के नाम :-*

"क्यूँ मुश्किलों में साथ देते हैं "दोस्त"
                     "क्यूँ गम को बाँट लेते हैं "दोस्त"
"न रिश्ता खून का न रिवाज से बंधा है !
       "फिर भी ज़िन्दगी भर साथ देते हैं "दोस्त "

रविवार, 19 मार्च 2017

*भरोसा उस पर करो*

*भरोसा उस पर करो*
    *जो आपके अंदर तीन*
       *बातें जान सके...*

   *मुस्कुराहट के पीछे दुःख,*
       *गुस्से के पीछे प्यार,*
   *चुप रहने के पीछे वजह ।*
      

*अकेले हम मिल जाएं तो ??*

*अकेले हम बूँद हैं,*
          *मिल जाएं तो सागर हैं।*
*अकेले हम धागा हैं,*
          *मिल जाएं तो चादर हैं।*
*अकेले हम कागज हैं,*
          *मिल जाए तो किताब हैं।*
*अकेले हम अलफ़ाज़ हैं,*
          *मिल जाए तो जवाब हैं।*
*अकेले हम पत्थर हैं,*
          *मिल जाएं तो इमारत हैं।*
*अकेले हम दुआ हैं,*
          *मिल जाएं तो इबादत हैं।*
     

सोमवार, 13 मार्च 2017

*नेचर बदल जाएगा*

*मैं खुश हूँ कि कोई मेरी...*
*बात तो करता है...*

*बुरा कहता है तो क्या हुआ...*
*वो याद तो करता है ...॥*

*कौन कहता हैं की नेचर और सिग्नेचर कभी बदलता नही*
*
*बस एक चोट की दरकार हैं*

*अगर ऊँगली पे लगी तो सिग्नेचर बदल जाएगा*
*और दिल पे लगी तो*
*नेचर बदल जाएगा*

बुधवार, 1 मार्च 2017

गुरुवचनों की माला

गुरुवचनों की माला:–
1. भजन का उत्तम समय सुबह 3 से 6 होता है|
2. 24 घंटे में से 3 घंटों पर आप का हक नही, ये समय गुरु का है |
3. कमाए हुए धन का 10 वा अंश गुरु का है. इसे परमार्थ में लगा देना चाहिए|
4. गुरु आदेश को पालना ही गुरु भक्ति है | गुरु का पहला आदेश भजन का है जो नामदान के समय मिला था |
5. 24 घंटों के जो भी काम, सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक करो सब गुरु को समर्पित करके करोगे तो कर्म लागू नही होंगे | अपने उपर ले लोगे तो पांडवों की तरह नरक जाने पड़ेगा, जो हो रहा है उसे गुरु की मोज समझो |
6. 24 घंटे मन में सुमिरन करने से मन और अन्तःकरण साफ़ रहता है. और गुरु की याद भी हमेशा रहेगी. यही तो सुमिरन है|
7. भजन करने वालो को, भजन न करने वाले पागल कहते है | मीरा को भी तो लोगो ने प्रेम दीवानी कहा था |
8. कही कुछ खाओ तो सोच समझ कर खाओ, क्योंकि जिसका अन्न खाओगे तो मन भी वैसा ही हो जायेगा |
मांसाहारी के यहाँ का खा लिए तो फिर मन भजन में नही लगेगा |
“जैसा खाए अन्न वैसा होवे मन, जेसा पीवे पानी वैसी होवे वाणी.”
9. गुरु का आदेश, एक प्रार्थना रोज़ होनी चाहिए |
10. सामूहिक सत्संग ध्यान भजन से लाभ मिलता है. एक कक्षा में होंशियार विद्यार्थी के पास बेठ कर कमजोर विद्यार्थी भी कुछ सीख लेता है, और कक्षा में उतीर्ण हो जाता है |
11. गुरु का प्रसाद यानी “बरक्कत” रोज़ लेनी चाहिए |
12. भोजन दिन में 2 बार करते हो तो भजन भी दिन में २ बार करना चाहिए, जिस दिन भजन न पावो उस दिन भोजन भी करने का हक नही |
13. हर जीव में परमात्मा का अंश है इसलिए सब पर दया करो, सब के प्रति प्रेम भाव रखो, चाहे वो आपका दुश्मन ही क्यों न हो. इसे सोचोगे की मैं परमात्मा की हर रूह से प्रेम करता हूँ तो भजन भी बनने लगेगा |
14. परमार्थ का रास्ता प्रेम का है, दिमाग लगाने लगोगे तो दुनिया की बातो में फंस के रह जाओगे |
15. अगर 24 घंटो में भजन के लिए समय नही निकाल पाते हो तो इससे अच्छा है चुल्लू भर पानी में डूब मरो |
16. आज के समय में वही समझदार है जो घर गृहस्थी का काम करते हुए भजन करके यहाँ से निकल चले, वरना बाद में तो रोने के सिवाय कुछ नही मिलने वाला |
17. अपनी मौत को हमेशा याद रखो. मौत याद रहेगी तो मन कभी भजन में रुखा नही होगा. मौत समय बताके नही आएगी |
18. साथ तो भजन जायेगा और कुछ नही. इसलिए कर लेने में ही भलाई है, और जगत के काम झूंठे है |
19. नरकों की एक झलक अगर दिखा दी जाये तो मानसिक संतुलन खो बैठोगे. इसलिए तो महात्माओ ने बताया सब सही है. वो किसी का नुकसान नही चाहते | बात तो बस विश्वास की है |
20. भोजन तो बस जीने के लिए खाओ. खाने के लिए मत जीवो. भोजन शरीर रक्षा के लिए करो |
21. परमार्थ में शरीर को सुखाना पड़ता है मन और इन्द्रियों को वश में करना पड़ता है जो ये करे वही परमार्थ के लायक है |
22. अपने भाग्य को सराहो कि आपको गुरु और नामदान मिल गये, जब दुनिया रोती नजर आएगी तब इसकी कीमत समझोगे |
23. किसी की निंदा मत करो वरना उसके कर्मो के भार तले दब जाओगे. क्यों किसी के कर्मों के लीद का पहाड़ अपने सर पर ले रहे हो |
24. भजन ना बनने का कारण है गुरु के वचनों का याद न रहना, गुरु वचनों को माला की तरह फेरते रहो जैसे एक कंगला अपनी झोली को बार बार टटोलता है |
25. इस कल युग में तीन बातो से जीव का कल्याण को सकता है. एक सतगुरु पूरे का साथ, दूसरा साधु की संगत और तीसरा “नाम” का सुमिरन, ध्यान और भजन,बाकी सब झगड़े की बाते है इस वक्त में सिवाय इन तीन बातो के और कर्मो में जीव का अकाज होता है

सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

आज का चिन्तन -28-2-2017. डॉ. ऐन.ऐम.छैया.

राधे राधे, आज का भगवद चिन्तन ॥।   
              28-02-2017
     🕉  गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से त्याग की चर्चा करते हुए कहते हैं कि जो कर्म हमें करने चाहियें जैसे दान-पुन्य, परोपकार सेवा आदि। अगर मनुष्य मोह के कारण इन कर्मों का त्याग करता है तो ये तामस त्याग है।
     🕉  कर्मों को दुःख रूप समझकर उनके परिणाम से भयभीत होकर और शारीरिक व मानसिक कष्टों से बचने के लिए किया गया त्याग राजस त्याग है।
   🕉    कर्मों का पूर्णतया त्याग कभी भी संभव नहीं, मगर कर्मों के फलों का त्याग अवश्य संभव है। जिस मनुष्य के द्वारा शास्त्रों की आज्ञा का निर्वहन करते हुए मात्र कर्तव्य पालन के उद्देश्य से आसक्ति और फल का त्याग करते हुए कर्म किया जाता है वही सात्विक और सच्चा त्याग माना है।

🌹💐🙏🏻JaiChamundaMa🙏🏻🌹🇮🇳