लेबल

रविवार, 5 फ़रवरी 2017

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2017

Difference between a Guru and a Teacher!!!!!!!

Guru Vs Teacher.What an explanation!!!!!!!!! Hats off to the writer

Difference between a Guru and a Teacher!!!!!!!

1. A teacher takes responsibility for your growth.
A Guru makes you responsible for your growth.

2.A teacher gives you things you do not have and require.
A Guru takes away things you have and do not require.

3. A teacher answers your questions.
A Guru questions your answers.

4. A teacher requires obedience and discipline from the pupil.
A Guru requires trust and humility from the pupil.

5. A teacher clothes you and prepares you for the outer journey.
A Guru strips you naked and prepares you for the inner journey.

6. A teacher is a guide on the path.
A Guru is a pointer to the way.

7. A teacher sends you on the road to success.
A Guru sends you on the road to freedom.

8. A teacher explains the world and its nature to you.
A Guru explains yourself and your nature to you.

9. A teacher gives you knowledge and boosts your ego.
A Guru takes away your knowledge and punctures your ego.

10. A teacher instructs you.
A Guru constructs you.

11. A teacher sharpens your mind.
A Guru opens your mind.

12. A teacher reaches your mind.
A Guru touches your spirit.

13. A teacher instructs you on how to solve problems.
A Guru shows you how to resolve issues.

14. A teacher is a systematic thinker.
A Guru is a lateral thinker.

15. One can always find a teacher.
But a Guru has to find and accept you.

16. A teacher leads you by the hand.
A Guru leads you by example.

17.When a teacher finishes with you, you celebrate.
When a Guru finishes with you, life celebrates.

Let us honor both, the teachers and the Guru in our lives...

मंगलवार, 31 जनवरी 2017

बसंत पंचमी का त्योहार

1 फरवरी 2017 को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा, ये त्योहार हर साल माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था. जानिये मां सरस्वती का जन्म कैसे हुआ...

पतझड़ के बाद बंसत ऋतु का आगमन होता है बंसत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है. स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है की ऋतुओं में मैं बसंत हूं. 

मां सरस्वती से मिलेगा विद्या का वरदान 

ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के प्रारंभ में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने मनुष्य की रचना की. लेकिन अपने सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे. उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है, जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है.

विष्णु जी से सलाह लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का. पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ. 

यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था. अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी. 

मां सरस्वती की सबसे प्रचलित स्तुति... 

ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया. जैसे ही देवी ने वीणा बजाना शुरू किया, पूरे संसार में एक मधुर ध्वनि फैल गई. संसार के जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई.

तब ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा. मां सरस्वती विद्या और बुद्धिप्रदान करती हैं. बसंत पंचमी के दिन इनकी उत्पत्ति हुई थी, इसलिए बसन्त पंचमी के दिन इनका जन्मदिन मनाया जाता है. मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है और विद्या और बुद्धि का वरदान मांगा जाता है. 

जानें कैसे मां सरस्वती की विशेष पूजा से निखरेगा व्यक्तित्व 

मांगे बुद्ध‍ि और ज्ञान का वरदान 
मां सरस्वती का संबंध बुद्धि से है, ज्ञान से है. यदि आपके बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता है, यदि आपके जीवन में निराशा का भाव बहुत बढ़ गया है, तो बंसत पंचमी के दिन मां सरस्वती का पूजन अवश्य करें. मां के आशीर्वाद से आपका ज्ञान बढ़ेगा और आप जीवन में सही निर्णय लेने में सफल होंगे. 

*सत्कर्म ही जीवन है।*

*नदी* का पानी *मीठा* होता है क्योंकि
              वो पानी *देती* रहती है।
*सागर* का पानी *खारा* होता है क्योंकि
             वो हमेशा *लेता* रहता है।
*नाले* का पानी हमेशा *दुर्गंध* देता है क्योंकि
              वो *रूका* हुआ होता है।
           *यही जिंदगी है*
*देते रहोगे* तो सबको *मीठे* लगोगे।
*लेते रहोगे* तो *खारे* लगोगे।और
अगर *रुक गये* तो सबको *बेकार* लगोगे।
   

निष्कर्ष : *सत्कर्म ही जीवन है।*

आज का चिन्तन -1-2-2017. डॉ. ऐन.ऐम.छैया.

राधे राधे -आज का भगवद चिन्तन,
                01-02-2017
      🕉  अध्यात्मिक जगत में एक शब्द है "कृपा"। विज्ञान की भाषा में इसे परिभाषित करना संभव नही है। कभी-कभी बहुत कोशिश से भी काम नहीं बनता तब आपने पाया होगा कि जो काम मेंहनत से नही बना अब वह अनायास ही बनने लगा।
     🕉   उस प्रभु की कृपा तो सबके ही ऊपर होती हे मगर उसे महसूस क़ोई- कोई कर पाते हैं। अधिकतर वह

🕉आश्चर्य" बनकर ही रह जाती है। नफरत से कुछ नही मिलता मेंहनत से कुछ - कुछ मिलता है और प्रभु की रहमत से सब कुछ मिल जाता है।
       🕉 आग्रह से कुछ मिल सकता है मगर अनुग्रह से सब कुछ मिलता है। कभी प्रयास से तो कभी प्रसाद से कई बार बात बन जाती है। इसलिए कर्म तो करते रहो लेकिन प्रभु से प्रार्थना भी करते रहो, अच्छा समय जरूर आयेगा।

💐🌹🙏🏻JajSriJrusna🙏🏻🌹💐🇮🇳

आज का चिन्तन -31-1-2017. डॉ. ऐन.ऐम.छैया.

राधे राधे-आज का भगवद चिन्तन,
           31-01-2017
      🕉  जिस प्रकार कमजोर नीव पर ऊँचा मकान खड़ा नहीं किया जा सकता ठीक इसी प्रकार यदि विचारो में उदासीनता, नैराश्य अथवा कमजोरी हो तो जीवन की गति कभी भी उच्चता की ओर नहीं हो सकती।
    🕉   निराशा का अर्थ ही लड़ने से पहले हार स्वीकार कर लेना है और एक बात याद रख लेना निराश जीवन मे कभी भी हास (प्रसन्नता) का प्रवेश नही हो सकता और जिस जीवन में हास ही नहीं उसका विकास कैसे संभव हो सकता है ?
    🕉   जीवन रूपी महल में उदासीनता और नैराश्य ऐसी दो कच्ची ईटें हैं, जो कभी भी इसे ढहने अथवा तबाह करने के लिए पर्याप्त हैं। अतः आत्मबल रूपी ईट जितनी मजबूत होगी जीवन रूपी महल को भी उतनी ही भव्यता व उच्चता प्रदान की जा सकेगी।

💐🌹🙏🏻JayChamunds🙏🏻🌹💐