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सोमवार, 17 अप्रैल 2017

*सच्चे सम्बन्ध ही वास्तविक पूँजी है ।।।*  

*संबंध कभी भी सबसे जीतकर नहीं निभाए जा सकते...*
*संबंधों की खुशहाली के लिए*
*झुकना होता है,*
*सहना होता है,*
*दूसरों को जीताना होता है*
        *और*
*स्वयं हारना होता है।*

*सच्चे सम्बन्ध ही वास्तविक पूँजी है ।।।*

 

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

*""सदा मुस्कुराते रहिये""*

: *" नफरतों में क्या रखा हैं ..,*
*मोहब्बत से जीना सीखो..,*
            *क्योकि*
*ये दुनियाँ न तो हमारा घर हैं ...*
                *और ...*
*न ही आप का ठिकाना ..,*
*याद रहे !                                        .       दूसरा मौका सिर्फ*                            
*कहानियाँ देती हैं , जिन्दगी नहीं....*..                                .                         *मानव कितने भी प्रयत्न कर ले* 
            *अंधेरे में छाया*
            *बुढ़ापे में काया*
                    *और*
          *अंत समय मे माया*
       *किसी का साथ नहीं देती*
             
     *""सदा मुस्कुराते रहिये""*

बुधवार, 12 अप्रैल 2017

आहिस्ता से पढना- पछतायेगा कौन ?

आहिस्ता से पढना- पछतायेगा कौन ?

एक वाक्य भी दिल में बैठ गया तो कविता सार्थक हो जायेगी -

मैं रूठा ,
      तुम भी रूठ गए
                      फिर मनाएगा कौन ?

आज दरार है ,
           कल खाई होगी
                           फिर भरेगा कौन ?

मैं चुप ,
     तुम भी चुप
          इस चुप्पी को फिर तोडे़गा कौन ?

छोटी बात को लगा लोगे दिल से ,
                 तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?

दुखी मैं भी और  तुम भी बिछड़कर ,
                   सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन ?

न मैं राजी ,
       न तुम राजी ,
             फिर माफ़ करने का बड़प्पन
                                       दिखाएगा कौन ?

डूब जाएगा यादों में दिल कभी ,
                        तो फिर धैर्य बंधायेगा कौन ?

एक अहम् मेरे ,
       एक तेरे भीतर भी ,
               इस अहम् को फिर हराएगा कौन ?

ज़िंदगी किसको मिली है सदा के लिए ?
              फिर इन लम्हों में अकेला
                                     रह जाएगा कौन ?

मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन
           एक ने आँखें....
                तो कल इस बात पर फिर
                                      पछतायेगा कौन ?

मंगलवार, 11 अप्रैल 2017

एकाग्रता की शक्ति को कैसे बढ़ाये

एकाग्रता की शक्ति को कैसे बढ़ाये
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۩  चाहे आप कहीं भी कोई भी काम कर रहे हों, हर जगह ध्यान भटकाने वाली चीजें होती हैं। इसलिए काम पर एकाग्र होना एक मुश्किल काम है। मनुष्य का मस्तिष्क ऐसा नहीं है कि वह आसपास होने वाले कोलाहल को नजरअंदाज कर सके। माहौल में जरा सी भी हलचल ध्यान भटकाने के लिए काफी होती है।एकाग्रता को बढ़ाने के लिए ढृढ़ता बेहद जरूरी हैं।

۩  जीवन में एकाग्रता बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसके इलावा हर क्षेत्र जैसे बिज़नस, जॉब, लौकिक पढ़ाई आदि। किसी भी कार्य में सफलता का आधार एकाग्रता होती है। एकाग्रता वास्तव में एक बहुत बड़ी *तपस्या* है, यह *निरंतर अभ्यास* से हासिल होती है। मन को एकाग्र करने के कुछ अनुभव में से *टिप्स* इस प्रकार हैं ―

۩  मन और बुद्धि का एक होकर कार्य में साथ देना। जितना मन-बुद्धि साथ होंगे उतनी एकाग्रता बढ़ेगी।

۩  *माहौल का करें चुनाव*
आप जिस माहौल में काम करते हैं, वह एकाग्रता को बढ़ाने में काफी महत्वपूर्ण होता है। आरामदायक और आकर्षक माहौल में काम करते समय पूरी तरह से एकाग्रता हासिल की जा सकती है।

۩  *विचारों को नियंत्रित करें*
अपने दिमाग में अनौपचारिक विचार न आने दें। इससे बेवजह ही आपकी एकाग्रता भंग होगी। जब भी मन में काम से अलग विचार आए तो उस पर ध्यान न दें और आप जो काम कर रहे हैं उन पर पूरी तरह से केंद्रित हो जाएं।

۩  *टाइम प्लान बनाएं*
आपको जो काम करना है उसकी सूची बना लें। इसमें संतुलन के जरूरी है कि गंभीर काम को पर्याप्त समय दें।

۩  *नकारात्मक न सोचें*
मन में ऐसे विचार न आने दें कि आप खुद को एकाग्र नहीं कर सकते। इससे दिमाग को यह संदेश जाएगा कि आपमें एकाग्रता की कमी है। ऐसे में काम पर ध्यान केंद्रित करना और भी मुश्किल हो जाएगा।

۩  *मल्टी-टास्किंग से बचें*
मल्टी-टास्किंग में कभी भी एकाग्रता हासिल नहीं की जा सकती। जब आपके सामने काम का अंबार होगा तो आप जो काम कर रहें हैं, उस पर ध्यान नहीं लगा पाएंगे।

۩  *लक्ष्य पर फ़ोकस करें*
जो लक्ष्य जीवन में लेकर चले उस पर सम्पूर्ण रूप से ध्यान दे। जो बात बीत गई उसे छोड दे।अपना प्रेजेंट अच्छे से अच्छा करे।व्यर्थ देखने का सुख हमें एकाग्र होने नही देता।

۩  *शोर शराबा न हो*
ये काफी महत्वपूर्ण है कि आप जहाँ काम कर रहे हैं वहाँ ज्यादा शोर शराबा न हो। इससे आप काम पर ध्यान केंद्रित कर सकते है।

۩  *आहार और व्यायाम*
एकाग्रता हासिल करने में संतुलित आहार और व्यायाम की भी अहम भूमिका होती है। जरूरी पोषक तत्व के अभाव से आप में थकान और आलस्य आ सकता है। इसलिए विटामिन ई से भरपूर बादाम और फल को अपने आहार में शामिल करें। साथ ही रूटीन के तहत व्यायाम भी करें।

۩  *काम को समझें*
अगर आप को यह अच्छी तरह से मालूम न हो कि आपको करना क्या है, तो ऐसे में काम के प्रति एकाग्र होना और भी मुश्किल हो जाता है।

۩  *टाल-मटोल न करें*
टाल-मटोल की आदत कभी न डालें। यह एकाग्रता पर गहरा असर डालता है। जबतक कि आप बोझिल कामों को निपटा न लें, अपनी सीट से न उठें।

۩  *सकारात्मक रहें*
जब भी आपको काम पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत हो तो हमेशा अपने आप से बार-बार कहें कि आप ध्यान लगा सकते हैं। यह आपके अंदर एकाग्रता बढ़ाने में मददगार साबित होगा।

۩  *काम को बांटे*
जिस काम का कोई स्पष्ट आरंभ और अंत न हो वह आपके ध्यान को भटका सकता है। अगर आपके पास कोई बहुत बड़ा प्रोजेक्ट हो तो एक रास्ते का चयन करें, जिससे आप उस काम को शुरू कर सकें।

۩  एकाग्रता मतलब किसी चीज़ को लेकर हमारा फोकस।जो एकाग्रता में रहते है उनके संकल्पों में बहुत बल होता है।

۩  *अनुशासन*
अपने आप को अनुशासन में रखना काफी जरूरी होता है। साथ ही प्रभावी काम के लिए जरूरी है कि आप उसमें ज्यादा समय दें। इसलिए छोटे काम से शुरुआत करें और अगर आप आसानी से ध्यान नहीं लगा पा रहे हैं, तो काम को पूरा समय दें।

۩  *अच्छी नींद लें*
अपने सोने का समय सुनिश्चित करें। अगर आप अच्छी नींद नहीं ले रहे हैं तो आप पर थकावट और आलस्य हावी रहेगा। ऐसे में आप किसी भी काम पर ध्यान नहीं लगा पाएंगे।

۩  *जरूरी चीजों की व्यवस्था करें*
इस बात को सुनिश्चित करें कि काम करने से पहले आपने उसके लिए जरूरी चीजों की व्यवस्था कर ली है। इससे अनावश्यक भटकाव नहीं होगा और आप स्थिर होकर काम कर पाएंगे।

۩  इसके इलावा एकाग्रता के अभ्यास के लिए छोटी छोटी चीज़ें फॉलो करना जैसे अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित करना, अपने मन की चेकिंग करना, अपने दिल की धड़कन की सुनना आदि।

۩ ۩  *अव्यक्त बापदादा* ۩ ۩

۩  जहाँ एकाग्रता होगी, वहाँ संकल्प, बोल और कर्म का व्यर्थपन समाप्त हो जाता है और समर्थपन आ जाता है । समर्थ होने के कारण सब में सिद्धि हो जाती है। (28-12-1979)

۩  *साइंस का महत्व क्यों है?*
प्रयोग में आती है तब सब समझते है, हाँ, साइंस अच्छा काम करती है तो साइलेंस की पॉवर का प्रयोग करने के लिए एकाग्रता की शक्ति चाहिए और एकाग्रता का मूल आधार है- मन की कंट्रोलिंग पॉवर, जिससे मनोबल बढ़ता है । मनोबल की बड़ी महिमा है, यह रिद्धि सिद्धि वाले भी मनोबल द्वारा अल्पकाल के चमत्कार दिखाते है । आप तो विधिपूर्वक, रिद्धि सिद्धि नहीं, विधिपूर्वक कल्याण के चमत्कार दिखाएंगे जो वरदान हो जायेंगे; आत्माओं के लिए यह संकल्प शक्ति का प्रयोग वरदान सिद्ध हो जायेगा । (15-12-1999)

۩  एकाग्रता बढ़ाने के लिए मन में श्रेष्ठ विचारो का होना अति आवश्यक हैं।बुद्धि को शुद्ध करे।
नीचे दिये गए स्वमान का अभ्यास करें।रात को सोने से पहले 108 बार 21 दिन तक लिखें:

👉 मैं एकाग्रचित्त आत्मा हूँ
👉मैं एक महान आत्मा हूँ।
👉मैं परम पवित्र आत्मा हूँ।

           संकल्प करें......मैं मास्टर सर्वशक्तिमान आत्मा हूँ....मेरे पास सभी शक्तिया हैं...मेरे पास एकाग्रता की शक्ति भी है।

۩  परमात्मा जो सर्वशक्तियों का सागर हैं, दाता हैं उसे जाने और उससे अपना connection जोड़े।धीरे 2 उसकी शक्तिया आपके अंदर आने लगेंगे और आपका मन शांत होता जायेगा। एकाग्रता बढ़ती जायेगी।और मानसिक डिस्टर्बेंस धीरे-धीरे समाप्त होता जाएगा।

۩ व्यर्थ देखना जैसे टीवी इंटरनेट कुदृष्टि आदि, व्यर्थ सुनना, व्यर्थ बोलना, व्यर्थ व अनावश्यक सोचना आदि पर नियंत्रण करने से 90% तक एकाग्रता को बढाया जा सकता है।

सोमवार, 10 अप्रैल 2017

जन्मदिन क्या है..??

जन्मदिन क्या है..??
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ये सवाल BBC World के एक प्रोग्राम में विश्व के तमाम बड़े VVIP की उपस्थिति में पूछा गया था..

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जिसका सबसे सुंदर जवाब डॉ अब्दुल कलाम जी ने दिया था.

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उन्होंने कहा था कि...

*जन्म दिन आपकी जिंदगी का एक मात्र वो दिन होता है जिस दिन आपके रोने की आवाज पर आपकी मां मुस्कराई थी*

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उसके बाद फिर ऐसा दिन कभी नहीं आता कि औलाद के रोने पर मां मुस्कराये.

मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

*अच्छा वक़्त उसी का होता हैं...*

*अच्छा वक़्त उसी का होता हैं...*
*जो किसी का बुरा नहीं सोचते हैं...*

*ये स्रृष्टि कहती है* …
      *मत सोच की तेरा*
        *सपना क्यों पूरा नहीं होता*
*हिम्मत वालो का इरादा*
         *कभी अधुरा नहीं होता*
*जिस इंसान के कर्म*
                 *अच्छे होते है*
*उस के जीवन में कभी*
             *अँधेरा नहीं होता*

रविवार, 2 अप्रैल 2017

*"पृथ्वी पर कोई समस्या ऐसी नहीं है"*

*पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है"*
      *"जिसको समस्या न हो"*
                 "और"
*"पृथ्वी पर कोई समस्या ऐसी नहीं है"*
*"जिसका कोई समाधान न हो*...

*मंजिल  चाहें  कितनी भी  ऊँची  क्यों न हो,  रास्ते  हमेशा  पैरों  के  नीचे  ही  होते है*